Arogyavardhini vati uses in hindi

Arogyavardhini vati uses in hindi

Arogyavardhini vati uses in hindi – आयुर्वेद में एक ऐसी औषधि है जो किसी भी बीमारी में दी जा सकती है । इसका मतलब है अगर कौन सी भी बीमारी में यह दी जाए तो उसका फायदा ही होगा ।जो लोग आयुर्वेद से परिचित है या फिर जिन्होंने जिंदगी में कभी भी आयुर्वेद के औषधि ली है उनको तो यह गोली पता ही होगी। उस औषधि का नाम है आरोग्यवर्धिनी बटी ।

आरोग्यवर्धिनी बटी बहुत ही फेमस है । तो आज हम आरोग्यवर्धिनी बटी के बारे में पूरी जानकारी लेंगे । वह किस किस बीमारी में दी जाती है । उसके फायदे कौन-कौन से हैं और कौन से बीमारी में अगर दी जाए तो उसका फायदा होता है। आरोग्यवर्धिनी वटी uses – arogyavardhini vati uses in hindi.

Arogyavardhini vati uses in hindi

आरोग्यवर्धिनी गोली का सबसे बड़ा उपयोग है fever में यानी बुखार । अंग्रेजी में इसे फीवर भी कहते हैं । छुटपुट फीवर यानी वायरल फीवर या फिर नॉर्मल सर्दी खांसी के बाद जो आने वाला फीवर है उसमें भी यह दी जाती है । और दूसरे जो खतरनाक फिवर है; जैसे की डेंगू , मलेरिया , टाइफाइड उनमें भी आरोग्यवर्धिनी अच्छा काम करती हैं।

कौन सा भी फीवर हो लेकिन सालों से यह गोली फीवर कम करने के लिए दी जा रही है । छुटपुट फिवर यानी वायरल फीवर में यह 5 से 7 दिनों तक दी जाती है । और खतरनाक फिवर यानी डेंगू मलेरिया इसमें ; यह 15 से 21 दिन तक दी जाती है।

इसका दूसरा सबसे बड़ा उपयोग है कुष्ठ रोग में । कुष्ठ रोग यानी लेप्रसी leprosy । कुष्ठ रोग अगर शुरुआती स्टेज में हो; बहुत ही ज्यादा फैलता ना हो तो आरोग्यवर्धिनी वटी से यह हंड्रेड परसेंट ठीक होता है । लेकिन इसकी ट्रीटमेंट जो है 5 से 6 महीने तक लगातार और कंटीन्यूअस करनी पड़ती है।

एलर्जी स्किन डिजीज – allergy यानी अचानक से पूरे शरीर पर खुजली आती है। red rash रेड रैश आ जाती है । बहुत ही ज्यादा खुजाता है । इस कंडीशन में आरोग्यवर्धिनी की गोली मंजिष्ठादि कषाय के साथ देने से खुजली कम हो जाती है।

फंगल इंफेक्शन एनी दाद खाज खुजली – fungal infection यह बहुत ज्यादा पाई जाती है और पूरे शरीर पर फैल जाते हैं । इसमें आरोग्यवर्धिनी बटी हल्दी के दूध के साथ दी जाती है । इसका कोर्स अगर लगातार एक महीने तक किया जाए तो दाद खाज खुजली पूरी तरह से ठीक होती है।

यह गोली पेट और उससे जुड़ी समस्याओं में बहुत ही उपयोगी है । यानी कि खट्टी डकार आना , पेट फूलना ,, पेट फूलने की वजह से पेट में दुख ना , कॉन्स्टिपेशन यानी सौच को साफ न होना ; एनोरेक्सिया यानी खाना खाने की मनीषा ना होना ; इन सब से छुटकारा पाने के लिए आरोग्यवर्धिनी बटी का 3 महीने का कोर्स करना पड़ता है ।

Hypersalivation – अगर आपको हाइपर्सलिवेशन है । हाइपर्सलिवेशन यानी मुंह से ज्यादा पानी आना । मुंह से पानी टपकना। अगर आपको टेस्ट बिल्कुल ही नहीं लगती हो ; किसी भी पदार्थ की मुख दुर्गंधी यानी मुख से खराब बास आती है। इन लोगों में आरोग्यवर्धिनी ही एकमात्र औषधि है ।

STD – सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिसीजेस इसमें गोनोरिया और सिफिलिस आता है । गोनोरिया और सिफिलिस का लक्षण क्या है कि गुप्तांग पर फोड़े आ जाते हैं , जख्म जैसा पैदा होता है । यह अपने आप ही होता है और लिंग से या फिर योनि से pus जाता है । pus यानी पीला मवाद । इससे निजात पाने के लिए 1 महीने का आरोग्यवर्धिनी का कोर्स करना पड़ता है ।

एनीमिया anemia- आरोग्यवर्धिनी इसमें लोह और अभ्रक भस्म पाया जाता है और इसी वजह से शरीर का आयरन कंटेंट बढ़ता है । आपको पता ही है कि HB बढ़ाने के लिए यह काम आता है । तो यह वटी खून की कमी से एनीमिया ठीक करने के लिए दी जाती है ।

आरोग्यवर्धिनी बटी ह्रद्य और सप्तधातु वर्धक होती है। ह्रुद्य इसका मतलब है की ह्रदय को हित कारक और सप्तधातु को बढ़ाती है उसे पोषण करती है । इसी वजह से ताकत भी बढ़ती है । यह गोली IHD ischemic heart disease हार्ट अटैक , ब्लड प्रेशर का बढ़ना, इन रोगों में भी फायदेमंद है ।

जैसे मैंने पहले बताया कि यह गोली विश्व के एकमात्र औषधि है जो किसी भी रोगों में दी जा सकती है । इससे हरेक रोगों में फायदा ही होता हैं।

Doses of arogyavardhini vati

दो गोली सुबह और दोपहर को और शाम को । यह गोली खाने के पहले ले लेनी होती है । गर्म पानी के साथ । कुछ लोगों में यह दूसरे औषधि के साथ भी ली जाती है वह मैंने ऊपर बताया है । और कितने दिनों तक लेनी है यह भी मैंने इस आर्टिकल में हरेक रोगों में कितनी लेनी पड़ती है यह भी मैंने मेंशन mention किया है ।

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